बुधवार, 12 जून 2024

शिल्पी संवाद भाग 14

 दोस्तों!

“शब्द सत्ता के शिल्पी” नामक व्हाटसएप समूह में 02 जून से 10 जून तक मतदान के सात चरणों वाले 44 दिवसीय सत्र के 1 जून 2024 को समापन, 04 -05 जून को हुई मतगणना और उसके बाद सरकार निर्माण पर कविता विनिमय आपके सामने प्रस्तुत है| दिनांक 10 जून 2024 तक प्रकाशित रचनाओं की एक झलक देखिए|

 

डॉ हिमांशु शेखर


इस अंक के सारस्वत शब्द शिल्पी 


बिंदु श्रीवास्तव, सुपौल

निशा राय, नोयडा

प्राणेंद्र नाथ मिश्र, कोलकाता 

प्रेरणा पारिश, नई दिल्ली 

डॉ हिमांशु शेखर, पुणे



चुनाव


आ गय हैं इक फकीर 

कहे हम हीं हैं वीर

आवाज़ में तान है

खादी का निशान है।

आ गया चुनाव है।


भरोसा का देते छिड़काव ।

हम हीं पे है झुकाव

हमको पहचानिए 

हम हीं पे बटन तानिए

विकास बहेगा गांव में ;

मत खोजिएगा गांव में

 बड़ा मेरा ख्वाब है

कुर्सी से लगाव है

आ गया चुनाव है।--३


हाथों को जोड़कर

दांतो को निपोडकर

वादे बजवाएंगे

पूरा  ' सच से नहवाएगे।

जनता जो भोली भोली 

भरेंगे अपनी झोली

पंचवर्षीय चैन के लिए;

निकाला इनका नाव है

आ गया चुनाव है।--३


मंदिर -मंदिर मत्था टेकते ;

लम्बी लम्बी ए हैं फेंकते।

सुख सुविधा छोड़कर

धान को  सिसोरकर

व्यस्कों को पुकारते

डालते पडाव है।

सूखी सूखी रोटी में 

दिखाते बड़ा चाव है।

यही तो दाव है।

आ गया चुनाव है।


बिन्दु श्रीवास्तव



माना की चुनाव ज़रूरी है 


यूँ तो चुनाव ज़रूरी है 

आम आदमी की आस भी ज़रूरी है

महंगाई पर क़ाबू हो 

बेरोज़गारी पर काम हो 

राजनीति में इंसानियत का मुद्दा गर्म हो 

कर्म जो किया हो वो धर्म से बड़ा हो 

सबकी सुरक्षा प्राथमिकता हो, 

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा अधिक हो 

खेल की सुविधा भी हर वक्त हो

प्रदूषण भी चुनाव का अजेंडा हों

शहर और गाँव दोनों स्मार्ट हो 

सड़कें गड्ढों से सम्पूर्ण मुक्त हो 

नालियों में पानी व बदबू कम हो 

बागों में पेड़ अधिक बेंच कम हो 

पक्षी विहार में पक्षी अधिक शोर कम हो 

सड़क पर ट्रैफ़िक में सुधार हो 

सरकारी दफ़्तर में करप्शन ना हो 

नागरिक की बात को वजन मिले 

खेतों में फसल अधिक अतिक्रमण कम हो 

नेता जो जनता की बात पर अड़ा हो 

सबके वादों को पूरा करने के लिए लड़ा हो 

उसको ही चुन कर भेजना 

तभी सरकार अधिक कामगार हो 

मतदान गुप्त हो याद रखना 

तुम्हारा एक वोट भी कम नहीं है 

चलो मॉडल बूथ सज गए , मतदान अधिक हो 

यहाँ नेता तभी चुन कर आएगा सबसे सर्वश्रेष्ठ ॥


निशा राय



सियासत


बिसात पर राजनीति की

इंसान  सिर्फ़  मोहरे  हैं ,

खुद को जो कहते जनप्रतिनिधि

निष्ठुर,संवेदनहीन और बहरे हैं,

हर लाश  पर  सियासत है

सांस  लेना  भी  आफ़त है,

टूट - बिखर   जाए   देश 

गंदी सियासत चलती रहे,

फायदा  मिले  जिससे

गरमाहट उन मुद्दों को

मिलती रहे,

तिजोरी अपनी भरने को

देश लूट डालेंगे,

मिल जुल के कोई रह न सके

ऐसी फूट डालेंगे,

जनता  को  तो  पड़े 

दो रोटी के भी लाले हैं,

जीमते छप्पन भोग ये

छलकाते मय के प्याले हैं,

पढ़े लिखे भी  शिकार

चिकने चुपड़े वादों का,

सबको मिलेगी रोटी - रोजगार             

उदघोष झूठे ऐसे नारों का,

ऐसे  धूर्तों  के  झांसे  में

जनता अब ना आना तुम,

कोई लगे ना  जब सही

गद्दी ही ना दिलाना तुम।


 प्रेरणा पारिश



व्यंगात्मक आश्चर्य 


भेड़िए नेता ने

भेड़ों को इकट्ठा किया,,

तरह तरह का भाषण दिया,,

और कहा,

सर्दियों के मौसम में 

यहां का तापमान

शून्य से नीचे गिर जाता है,,

भेड़ों का समाज

ठिठुरा रह जाता है,,,

आप हमे वोट देकर जिताइए

विजयी बनाइए

हम 

इस समस्या का

समाधान करेंगे,,,

प्रत्येक भेड़ के लिए

गर्म स्वेटर का

इंतजाम करेंगे,,,

तालियों की गड़गड़ाहट से

गूंज उठा पंडाल,,

नेता जी की जय!

के नारों से 

हो गए नेता जी निहाल,,,

जब थोड़ा शांति हुई

एक मेमने ने 

अपनी मां से पूछा -

मां!

स्वेटर मिली तो 

हम सभी ठंड से बच जायेंगे,,

लेकिन

स्वेटर के लिए ऊन

नेता जी कहां से लायेंगे???


,,,,प्राणेंद्र नाथ मिश्र


दिल्ली वालों को " वोट दिवस" की शुभकामनाएं,,,


वोट जो देने हम गए, ग़ज़ब हो गया, भाई!

बहुत पुरानी प्रेमिका, आगे पड़ी दिखाई

आगे पड़ी दिखाई, पीछे थी पत्नी मेरी

सांप छछूंदर जैसी गति हो गई थी मेरी

कहें गुरु "असहाय", किया मन ही मन यह note 

Coalition सरकार हो बेहतर, दे दूं यदि मैं वोट।


स्वयंवरा ने हाथ में थामा है जयमाल

प्रत्याशी सज धज खड़े, ताकें उसकी चाल

ताकेँ उसकी चाल, देखे वह चिन्ह सभी के

और सोचती, सभी तो हैं रावण की मति के

कहें गुरु अनुकूल, तभी वह बन के मंथरा

चुना राम को कठिन कार्य के लिए स्वयंवरा।


,,,,,प्राणेंद्र नाथ मिश्र



इंतजार की घड़ियां 

02.06.2024


फोड़ेगा सब ठीकरा, किसपर बोलो आज?

है विपक्ष का गान ये, इवीएम नाराज।

इवीएम नाराज, बंद जुबान की टक्कर।

परिणामों की आस, खत्म हो सारा चक्कर।

कह शेखर सन्यास, लिया ध्यानी छोड़ेगा।

दोनों पक्ष-विपक्ष, ठीकरा सब फोड़ेगा।


बहुमत दल से ही बने, पंत प्रधान विचार।

पर गठबंधन से बने, यही क्रांति आधार।।

यही क्रांति आधार, दिखे नेता बहुतेरे।

घटता जन-आधार, लगा जनता मुॅंह फेरे।।

कह शेखर अब बंद, हुई इवीएम में ही।

किस्मत जिसके साथ, बने बहुमत दल से ही।।


मुद्दे नूतन उठ गए, जिनसे ना कल्याण।

मंगलसूत्रों की सुने, संविधान पर बाण।।

संविधान पर बाण, कमल भगवा लहराए।

साइकिल, थप्पड़, तृण, झाड़ू, हाथी बताए।।

कह शेखर इस बार, बनाते कीचड़ को धन।

उछले नेता हार, उठ गए मुद्दे नूतन।।


सत्ता दल की जेब में, आयकर, इडी, जान।

लगा रहे आरोप ये, सारे लें पहचान।।

सारे लें पहचान, सभी हम्माम में नंगे।

सत्ता दल बदनाम, नहीं करने दे दंगे।।

कह शेखर फाइलें, खुली है हर बादल की।

है बरसात रिमोट, जेब में सत्ता दल की।।


डॉ हिमांशु शेखर



 एक व्यंग्य: क्या हुआ तेरा वादा!!


नेताजी आए हैं

दबाकर पान मुँह में

हौले से मुस्काए हैं

कर रहे करबद्ध निवेदन,

भाईयों और बहनों,

"सेवक आपका हूँ

सेवा में ही रहूँगा

बिजली पानी सड़क नाले

सबका जैसे रखा ध्यान

आगे भी रखूँगा 

कभी पीछे नहीं हटूँगा "

पास ही बजबजाती नाली में

पिच्च से फेंकी पीक

नल की टोंटी खोली

बरसों से होती जो लीक

पानी तो जा चुका था

गमछे से ही पोंछा चेहरा

हमको ही देना फ़िर वोट

जनता से किया पुनः निहोरा,

गड्ढों से पटी सड़क पे

चल पड़े तेज़ी से आगे को

कल्लू की टूटी झोंपड़ी में

रूखा सूखा खा

तस्वीर खिंचवाने को

टिमटिमाते जलते दीए में

आभा अपनी फैलाने को

भोलीभाली  जनता को

ठग कर फ़िर से जाने को,


जय हो नेताजी

देख लिया आपका वादा

कुछ नहीं बदलने वाला

जब तक बदलता नहीं

आप जैसों को चुनने का

बेवकूफी भरा जनता का इरादा।


प्रेरणा पारिश



Exit poll या Exact poll ?


यह थी रात अंतिम यह थी रात भारी

बेचैन हो रही है यह, अपोजिशन सारी

कल की सुबह राम आशीष देंगे 

विजय पथ पे होगी विजय की सवारी


यह  श्वेत  मेघ का  गर्जन है

झूठी दुंदुभी घनघोर है क्या?

Exit, Exact अलग तो नहीं

संकेत से ज़्यादा शोर है क्या?


घी औ छाछ, माखन, दही, एक ही कुल जनमाय

फिर भी कीमत अलग है, श्रेष्ठ जो, तप तप जाय ।  


प्राणेंद्र नाथ मिश्र



जनादेश 

04.06.2024


जनादेश है जिन्न जो, था चिराग में कैद,

जनता, नेता, बैठते, दिखे सभी मुस्तैद।

इवीएम को घिस रहे, नेताओं के लोग,

किस्मत सुधरेगी अभी, या लग जाए रोग।

इवीएम से देखिए, बाहर आए जिन्न,

गिनने वाले हो रहे, कठिनाई से खिन्न।

प्रत्याशी अब पूछते, अंतिम बोलो बात,

जीता हूॅं या पड़ गई, मतदाता की लात।

प्रसव वेदना में अभी, इवीएम आगार,

गणना कर जन्मे अभी, नई नई सरकार।

बिकी मिठाई, मालाएं, होली जैसे रंग,

गणना तक धड़कन रूके, फिर होगा हुड़दंग।

इवीएम सक्रिय हैं, कुंभकर्ण कर याद,

पाॅंच वर्ष तक ना करें, फिर इसपर संवाद।

इवीएम सोने चला, आज रहा पर जाग,

निश्चित देता ताज वो, उगल उगल कर आग।

इवीएम से इश्क बस, आज चढ़ा परवान,

बहुत प्यार हो एक दिन, दिल भूलेगा जान।

शेखर कहता इश्क ये, पलभर का है गान,

बिन निकाह, तलाक तक, चले यही फरमान।


डॉ हिमांशु शेखर 



उलटबांसियां


पंख उठाये गदहा नाचे, पूंछ हिलाए मोर 

निर्वाचन की परिणति, जनता पर नहि जोर


गधे पंजीरी खा रहे, मानुष खाए घास

बुद्धिमान सोते रहे, मूरख हो गए पास 


दो हाथों में डालिए, पैजामा के पैर

मुख नारे से बांधिए, कभी न होए बैर 


मेघ धरा पर घूमते, ज्वालामुखी अकास

बीच में लटका आदमी, हो रहा सत्यानास 


आलू सारे डाल कर, सोना दिया निकाल

सौ टन सोना मिल गया, पप्पू मालामाल।


पलटू की एंट्री हुई, जोकर आना बंद

ताश के पत्तों में घुसे, शक वाले जयचंद।


नमक की रोटी बेल के, जल में सेंका, भाई!

वॉट्स ऐप पर ज्ञान दे, किस्मत है चमकाई।


,,,प्राणेंद्र नाथ मिश्र



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